Courses After 12th: ऑप्टिक्स एक्सपर्ट   कॅरिअर को करें रोशन
Books / 36/ 3 months ago

Courses After 12th: ऑप्टिक्स एक्सपर्ट कॅरिअर को करें रोशन

मोबाइल, कंप्यूटर और टेलीविजन लगातार लंबे समय तक देखने के कारण बच्चों की ही नहीं, अपितु युवाओं की भी आंखे प्रभावित हो रही हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए भारत में आने वाले वर्षों में योग्य ऑप्थेल्मिक ऑप्टिक्स एक्सपर्ट्स (ऑप्टोमेट्रिस्ट) की मांग में जबर्दस्त इजाफा होने वाला है।
हाल ही में हुआ एक सर्वेक्षण बताता है कि भारत में दो लाख लोगों के लिए महज एक ट्रेंड ऑप्टोमेट्रिस्ट है, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देशों में प्रति दस हजार व्यक्तियों पर एक ऑप्टोमेट्रिस्ट है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में फिलहाल दो लाख से ज्यादा क्वालिफाइड ऑप्टोमेट्रिस्ट की जरूरत है। समस्या इस बात की है कि मेक्यूलर डिजनरेशन तथा डाइबेटिक रेटिनोपैथी इन दिनों वृद्धजनों का आम रोग हो गया है। इन सभी के उपचार में ऑप्टोमेट्रिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। यही कारण है कि इन दिनों भारत में प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट की मांग बढ़ती जा रही है। यदि आप दूसरों की आंखों की रोशनी बचाकर अपना कॅरिअर रोशन करना चाहते हैं तो ऑप्थेल्मिक ऑप्टिक्स में उजला कॅरिअर बना सकते हैं। यह कॅरिअर निश्चित ही आपको बहुत रास आएगा, क्योंकि सूनी आंखों को जगमग रोशनी से भरकर न केवल आपको मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि आर्थिक संतुष्टि भी मिलेगी, क्योंकि उभरता हुआ कॅरिअर होने से इसमें अपार संभावनाएं हैं। यह एक गतिशील तथा चुनौतीपूर्ण कॅरिअर है, जो व्यक्तिगत विकास तथा सामाजिक सम्मान के साथ-साथ जॉब फ्लेक्सिबिलिटी, वित्तीय सफलता और असीमित अवसर प्रदान करता है।

ऑप्थेल्मिक ऑप्टिक्स है क्या

ऑप्थेल्मिक ऑप्टिक्स वह विज्ञान है, जो मनुष्य की आंख की कार्यप्रणाली से संबद्ध है। यह हेल्थ केयर प्रोफेशन आंखों के सही परीक्षण, सही तरह से डायग्नोस और आंखों के सही तरह से इलाज से संबंधित है। यह विज्ञान ऑप्टिकल सिस्टम, लैंसेज के इस्तेमाल और अन्य तरह की ऑप्टिकल मदद, रेफ्रेक्टिव एरर और उसके सुधार से संबंधित है। एक ऑप्टोमेट्रिस्ट ऑप्टोमेट्री का डॉक्टर (ओडी) होता है, मेडिकल डॉक्टर नहीं होता। वह आंखों की असामान्यताओं को दूर करने के लिए विभिन्न विजन थेरेपियों का प्रयोग करता है और आंखों के लिए दवाएं लिख सकता है। ऑप्टोमेट्रिस्ट के कार्यों में नेत्र रोगों के ऑक्यूलर और विजुअल लक्षणों को पहचानना, आंखों को प्रभावित करने वाली ढेरों समस्याओं को समझना तथा रोगियों को उपचार हेतु यथोचित विशेषज्ञों के पास भिजवाना शामिल होता है।

 
इस प्रकार एक ऑप्टोमेट्रिस्ट आंखों से संबंधित समस्याओं की पहचान कर उसका उपचार द्वारा निदान करता है। ऑप्टोमेट्रिस्ट निर्धारित विशिष्टताओं के अनुसार लैंस फेब्रिकेयर कर उन्हें व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप फिट करता है। वह हाईटेक मशीनों का उपयोग कर लैंसों को हार्ड या सॉफ्ट बनाता है और उनके ऊपर पॉलिश भी करता है। भारत में ऑप्टोमेट्रिस्ट को सर्जरी करने की इजाजत नहीं होती है। अर्थात वह आंखों की सर्जरी को छोड़कर आंखों के उपचार से संबंधित बाकी सभी काम कर सकता है। एक ऑप्टोमेट्रिस्ट का काम आंखों की देखभाल के बारे में मरीजों को सलाह देना है। वह कांटेक्ट लैंस के लिए सलाह दे सकता है, आंखों की मसल्स या भैंगेपन को ठीक करने के लिए एक्सरसाइज बता सकता है, चश्मे का नंबर दे सकता है आदि। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक बड़ी चुनौती है, इसलिए उसे स्वयं को लगातार अपडेट रखना होता है। ऑप्टोमेट्रिस्ट को लगातार आंखों का परीक्षण, पब्लिक हेल्थ ऑप्टोमेट्री के अलावा काउंसलिंग सर्विसेज भी देनी होती है और अल्प दृष्टि दोष को दूर करने में मदद भी करनी होती है। वे व्यवस्थित तरीके से मरीजों की बीमारी को डायग्नोस करते हैं और उन्हें उचित विशेषज्ञ के पास भेजने की सिफारिश करते हैं। इस तरह उनकी भूमिका प्राथमिक आई केयर प्रोवाइडर की होती है। एक ऑप्टोमेट्रिस्ट अस्पतालों में या क्लीनिक्स में ऑफ्थैल्मोलॉजिस्ट के सहायक के रूप में नौकरी प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा प्राइवेट ऑप्टिकल सैटअप में काम करने के अलावा अपना स्वयं का क्लीनिक भी प्रारंभ कर सकता है। वैसे देखा जाए तो ऑप्थेल्मिक ऑप्टिक्स एक विज्ञान है। यह भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान का मिला जुला रूप है, क्योंकि एक ओर इसमें आंखों की एनाटॉमी और फिजियोलॉजी का अध्ययन किया जाता है तो दूसरी तरफ ऑप्टिक्स लैंस तथा रिफरेक्टिव इंडेक्स जैसे भौतिक शास्त्र के विषयों की पढ़ाई भी करना होती है।

कैसे बनाएं कॅरिअर

अगर आप इस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, तो इस कोर्स के लिए न्यूनतम क्वालिफिकेशन साइंस स्ट्रीम से 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास करना है। फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलाॅजी, मैथ्स से 12वीं पास स्टूडेंट्स ऑप्टोमेट्री से रिलेटेड कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। ऑप्टोमेट्री में बैचलर डिग्री, बीएससी या फिर डिप्लोमा कोर्स के लिए रास्ते खुल जाते हैं। जहां डिप्लोमा कोर्स की अवधि दो वर्ष है, वहीं बैचलर डिग्री चार वर्ष की होती है। बैचलर डिग्री में तीन साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप होती है। बतौर ऑप्टोमेट्रिस्ट अस्पतालों और क्लीनिक्स में जॉब प्राप्त किया जा सकता है, जहां नेत्र रोग चिकित्सक की सहायता करनी होती है। यदि चाहें तो ऑप्टिकल एस्टेब्लिशमेंट में स्वतंत्र रूप से कार्य किया जा सकता है। प्रोफेशनल ऑप्थेल्मिक ऑप्टिक्स एक्सपर्ट को शुरुआत में 20 से 25 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। यदि अच्छे संस्थान से कोर्स किया है तथा क्षमताएं अच्छी हैं तो योग्यतानुसार यह वेतन और अधिक हो सकता है।

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