जानिए बीएनपीएल 2.0 बी2बी कॉमर्स डायनामिक्स के जरिए क्या हो रहे हैं परिवर्तन
Marketing / 41/ 2 months ago

जानिए बीएनपीएल 2.0 बी2बी कॉमर्स डायनामिक्स के जरिए क्या हो रहे हैं परिवर्तन

बाय नाउ, पे लेटर या प्रचलित नाम में बीएनपीएल फिनटेक के क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चित विषय बन गया है। और आफ्टरपे द्वारा स्क्वायर के 29 बिलियन डॉलर के अधिग्रहण से लेकर दुनिया में दक्षिणपूर्व एशिया, यूरोप, लेटिन अमेरिका में वीसी के सहयोग वाली अनेक बीएनपीएल कंपनियों तक, सभी ने अपने ग्राहकों को बीएनपीएल प्रस्तुत करने में तेजी लाई है। खासकर कोविड के बाद, बीएनपीएल के रूप में इंस्टैंट क्रेडिट के अपनाए जाने से दुनिया के लाखों लोग ऑनलाईन शॉपिंग करने में समर्थ बने। क्रेडिट कार्ड एक उत्तम उत्पाद है या नहीं, इस बारे में बहस जारी है, लेकिन बीएनपीएल आगे भी जारी रहने वाला है।

बीएनपीएल क्या है, भुगतान प्लस क्रेडिट

बीएनपीएल में भुगतान और क्रेडिट उत्पाद, दोनों का बेहतरीन संगम है। अपने नाम के अनुसार, बाय नाउ, पे लेटर इस उत्पाद की मुख्य विशेषता है। ‘बाय नाउ’ से वह विनिमय प्रदर्शित होता है, जिसके लिए भुगतान किया जाता है (जो ज्यादातर मामलों में बीएनपीएल के लिए ऋणदाता या क्रेडिट प्रदाता द्वारा होता है) और ‘पे लेटर’ से इंस्ट्रूमेंट की क्रेडिट/ऋण की प्रकृति प्रदर्शित होती है।

पूरी दुनिया के ग्राहक समय-समय पर खरीद करने के लिए बीएनपीएल उत्पाद का इस्तेमाल करते आए हैं, जहां बीएनपीएल प्रदाता/ऋणदाता उनकी ओर से मर्चैंट को भुगतान करता है (यह ऋण सीधे बेनेफिशियरी मर्चैंट को दिया जाता है) और समझौते के अनुरूप विशेष अवधि में बीएनपीएल प्रदाता/ऋणदाता को लौटा दिया जाता है। रियल-टाईम तत्काल उपलब्ध बीएनपीएल उत्पाद के बढ़ते उपयोग के कारण ई-कॉमर्स में भारी वृद्धि हुई है। हालांकि बी2बी के क्षेत्र में इसी तरह की प्रस्तुति के इस्तेमाल का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें दो व्यवसायों या एसएमई के बीच इसी तरह के विनिमय हो रहे हैं और पेमेंट्स-कम-क्रेडिट उत्पाद से यह काम आसान हो जाएगा।

बी2बी पेमेंट्स और बी2बी कॉमर्स स्पेस

बी2बी विनिमय एक बहुत विशाल क्षेत्र है, जो दुनिया में 100 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच रहा है। हर दिन अनेक छोटे और बड़े व्यवसाय वस्तु व सेवाओं को खरीदने के लिए विनिमय करते हैं। ये विनिमय मुख्यतः दोनों पक्षों/इकाईयों के बीच विनिमय की शर्तों पर एक औपचारिक समझौते के बाद क्रियान्वित होते हैं, जिनमें वस्तुओं या सेवाओं के लिए कमर्शियल या मूल्य शामिल होते हैं। इस विनिमय में मुख्यतः एक इनवॉईस होती है, जो वस्तु (या सेवाएं) प्रदान करने वाली इकाई द्वारा उन्हें खरीदने वाली इकाई के लिए निर्मित की जाती है। इसके बाद विनिमय को पूरा करने के लिए इस इनवॉईस का भुगतान एक विशेष अवधि में किया जाता है, जो उस वस्तु (या सेवाओं) की प्राप्ति पर निर्भर करता है।

इसे बी2बी कॉमर्स के क्षेत्र में सरल रूप में समझा जा सकता है। इन्वेंटर/वस्तु खरीदने का इच्छुक रिटेलर वितरक के पास जाता है, वस्तुओं का चयन करता है, भुगतान करता है और ऑर्डर की डिलीवरी उसके परिसर में कर दी जाती है। इस तरह के विनिमय, जो मूलतः ऑफलाईन होते हैं, वो अब डिजिटाईज़ कर दिए गए हैं और बी2बी बाजार में अनेक डिजिटल मार्केटप्लेस, एग्रीगेटर एवं प्लेटफॉर्म आ गए हैं। छोटे व्यवसाय इस बी2बी मार्केटप्लेस में जाते हैं और नियमित रूप से खरीदी जाने वाली चीजें खरीदते हैं। संपूर्ण बी2बी कॉमर्स में डिजिटल बी2बी का हिस्सा अभी भी कम और एक डिजिट में है, लेकिन यह खासकर कोविड काल के बाद बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण कई एसएमई को अपना सामान खरीदने के लिए भौतिक साधन कम हो गए हैं और वो लचीले एवं सुविधाजनक डिजिटल बी2बी कॉमर्स द्वारा खरीद कर रहे हैं।

बी2बी कॉमर्स एवं क्रेडिट - मजबूत संबंध

ज्यादा से ज्यादा एसएमई अपनी बी2बी खरीद के लिए डिजिटल हो रही है, ऐसे में विनिमय को पूरा करने के लिए उनके अनुभव को स्ट्रीमलाईन किए जाने की जरूरत है। इन बी2बी विनिमयों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भुगतान एवं चेकआउट का अनुभव है। बी2बी भुगतान एवं बी2बी कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मार्केटप्लेस अभी भी विकास कर रहे हैं। जहां यूपीआई ने भारत में पी2पी और पी2एम भुगतान की डाईनामिक्स बदल दी है, वहीं विनिमय में निहित जटिलता के कारण बी2बी भुगतान काफी जटिल हैं। सबसे ऊपर यह कि एसएमई और रिटेलर्स पारंपरिक रूप से समय के साथ अपने सप्लायर्स के साथ एक मजबूत संबंध स्थापित करते आए हैं, और हर बार विनिमय करने पर उन्हें क्रेडिट एवं भुगतान की शर्तों के मामले में विशेष सुविधाएं मिलती रही हैं। एसएमई द्वारा अपने सप्लायर को ज्यादातर भुगतान तत्काल नहीं किए जाते हैं, बल्कि विलंब के साथ किए जाते हैं। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका एसएमई के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट पर सीधा असर होता है।

कल्पना करें कि एक रिटेलर एक वितरक से वस्तुएं खरीदता है और उसे अपनी सभी खरीद के लिए भुगतान पहले करने को कहा जाता है, हालांकि इन वस्तुओं शेल्फ से बिकने में कुछ समय लगता है (कुछ हफ्तों का समय)। इससे एसएमई/रिटेलर पूंजी की जरूरत के मामले में काफी दबाव पड़ता है। साथ ही जब यह एसएमई अपने व्यवसाय को बढ़ाना चाहती है और इसलिए उसे अपनी सामान्य खरीद से 1.2 गुना से 1.5 गुना ज्यादा सामान खरीदना पड़ता है, तो वह ऐसा नहीं कर पाती, क्योंकि उसके पास पूंजी नहीं होती। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि बी2बी कॉमर्स के विनिमयों को नियमित आधार पर क्रेडिट का सहयोग मिले, ताकि एसएमई लिक्विडिटी की फिक्र किए बगैर विनिमय करने और अपने व्यवसाय बढ़ाने में समर्थ बनें। डिजिटल बी2बी कॉमर्स में काम करने वालों और मार्केटप्लेसेज़ के लिए उत्पाद, मूल्य, संग्रह, गुणवत्ता, सेवा और लॉजिस्टिक्स/सप्लाई चेन के अलावा क्रेडिट उनकी संपूर्ण व्यवसायिक वृद्धि का एक मुख्य स्तंभ है।

कंज़्यूमर बीएनपीएल उत्पाद (बीएनपीएल 1.0) एसएमई के लिए काम क्यों नहीं करते

बी2बी मार्केटप्लेस से खरीद करने वाले एसएमई को वस्तुएं डिलीवर होने से पहले अपफ्रंट क्रेडिट की जरूरत होती है। इसके बाद वो एक निर्धारित अवधि में भुगतान वापस लौटा सकते हैं। बाय नाउ, पे लेटर या बीएनपीएल वस्तुओं की योजना में पूरी तरह फिट होता है और यह रिकरिंग कैश फ्लो की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। हालांकि बी2बी कॉमर्स या बी2बी विनिमयों के लिए बीएनपीएल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखने वाली हैं और कंज़्यूमर बीएनपीएल उत्पाद या बीएनपीएल 1.0 इसमें फिट नहीं होंगे।

कंज़्यूमर बीएनपीएल उत्पादों में मुख्यतः लिमिट-बेस्ड एक्सपोज़र होता है, और इनका निर्धारण ऑनबोर्डिंग के समय बौरोअर के आकलन के आधार पर होता है। ये लिमिट क्रेडिट ब्यूरो, आय एवं वैकल्पिक डेटा के मिश्रण के अनुसार तय होती है। अधिकांश बीएनपीएल उत्पाद (जिनमें टिकट साईज़ काफी बड़ा होता है) ईएमआई पर आधारित होते हैं, जिसमें खरीद के विनिमय को ईएमआई में तब्दील किया जाता है। व्यवसाय की प्रकृति को देखते हुए एसएमई बीएनपीएल के लिए ज्यादा लचीला दृष्टिकोण चाहिए।

बी2बी कॉमर्स और बी2बी भुगतानों के लिए बीएनपीएल 2.0

बी2बी बीएनपीएल यानि बीएनपीएल 2.0 के लिए यह महत्वपूर्ण है कि यह उत्पाद अंडरराईटिंग के आधार पर कैश फ्लो के सिद्धांतों पर निर्मित हो, जिसमें एसएमई से फाईनेंशल या आय का डेटा एकत्रित न किया जाए और यह निर्णय उनके सप्लायर या बी2बी मार्केटप्लेस में विनिमय के इतिहास के आधार पर हो। साथ ही, एसएमई की अस्थिर प्रकृति को देखते हुए यह जरूरी है कि बीएनपीएल नो ईएमआई के साथ आए और भुगतान के लिए एसएमई को पूरा लचीलापन प्रदान करे। इसलिए पुनर्भुगतान की शर्तों को उस सेक्टर के आधार पर तय किए जाने की जरूरत है, जिसमें वह व्यवसाय मौजूद है। उदाहरण के लिए, रूपीफाई में हम एफएमसीजी/किराना स्टोर्स को 14 दिन का बीएनपीएफ (बाय नाउ, पे फ्लेक्ज़िब्ली) उत्पाद प्रदान करते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स/मोबाईल फोन रिटेलर्स को 45 दिन का बीएनपीएफ उत्पाद प्रदान करते हैं। इस तरह हम अलग-अलग उद्योगों में मार्जिन और उद्योगों की अनुमानित अस्थिरता के अनुरूप मूल्य तय करने में समर्थ बनते हैं, जिनका असर भुगतान के अनुमानित जोखिम पर होता है।

एसएमई बीएनपीएल में प्रारंभिक तेजी और भविष्य

भारतीय एसएमई ने कोविड के बाद पिछले 1.5 सालों में मुश्किल समय देखा है, और एसएमई बीएनपीएल से उन्हें जरूरत पड़ने पर अपनी पूंजी का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। भारतीय एसएमई के लंबे विस्तार पर केंद्रित रहकर बीएनपीएल 2.0 उनको भी प्रदान किया जा सकता है, जिन्हें मासिक क्रेडिट लिमिट के मामले में 10,000 रु. के मामूली टिकट साईज़ की जरूरत है और उनकी खरीद के लिए 100 रु. तक के मामूली विनिमय होते हैं। बी2बी कॉमर्स भारत में अप्रत्याशित गति से डिजिटाईज़ हो रहा है। पिछली तिमाही में एसएमई बीएनपीएफ वॉल्यूम 200 प्रतिशत एमओएम की दर से बढ़े हैं। ये केवल शुरुआती दिन हैं, हमें विश्वास है कि हमारे देश में औपचारिक क्रेडिट की उपलब्धता कम होने के साथ, एसएमई निश्चित ही बीएनपीएल2.0 द्वारा अपनी व्यवसायिक वृद्धि कर सकेंगे।

By - अनुभव जैन, को-फाउंडर एवं सीईओ, रूपीफाई

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